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  • Sawan Month Special

    सावन माह की विशेषता | Speciality of Shravan Month


    हिन्दु धर्म के अनुसार सावन के पूरे माह में भगवान शंकर का पूजन किया जाता है. इस माह को भोलेनाथ का माह माना जाता है. भगवान शिव का माह मानने के पीछे एक पौराणिक कथा है. इस कथा के अनुसार देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से अपने शरीर का त्याग कर दिया था. अपने शरीर का त्याग करने से पूर्व देवी ने महादेव को हर जन्म में पति के रुप में पाने का प्रण किया था. अपने दूसरे जन में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमालय और रानी मैना के घर में जन्म लिया. इस जन्म में देवी पार्वती ने युवावस्था में सावन के माह में निराहार रहकर कठोर व्रत किया. यह व्रत उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किए. भगवान शिव पार्वती से प्रसन्न हुए और बाद में यह व्रत सावन के माह में विशेष रुप से रखे जाने लगे.

    शिव पूजन क्यों किया जाता है | Why Shiv Pujan is Done

    प्राचीन ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से विष निकला था. इस विष को पीने के लिए शिव भगवान आगे आए और उन्होंने विषपान कर लिया. जिस माह में शिवजी ने विष पिया था वह सावन का माह था. विष पीने के बाद शिवजी के तन में ताप बढ़ गया. सभी देवी - देवताओं और शिव के भक्तों ने उनको शीतलता प्रदान की लेकिन शिवजी भगवान को शीतलता नहीं मिली. शीतलता पाने के लिए भोलेनाथ ने चन्द्रमा को अपने सिर पर धारण किया. इससे उन्हें शीतलता मिल गई. ऎसी मान्यता भी है कि शिवजी के विषपान से उत्पन्न ताप को शीतलता प्रदान करने के लिए मेघराज इन्द्र ने भी बहुत वर्षा की थी. इससे भगवान शिव को बहुत शांति मिली. इसी घटना के बाद सावन का महीना भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता है. सारा सावन, विशेष रुप से सोमवार को, भगवान शिव को जल अर्पित किया जाता है. महाशिवरात्रि के बाद पूरे वर्ष में यह दूसरा अवसर होता है जब भग्वान शिव की पूजा बडे़ ही धूमधाम से मनाई जाती है.

    SOMVAR VRAT KATHA { in HINDI }

    श्रावण सोमवार की कथा: अमरपुर नगर में एक धनी व्यापारी रहता था। दूर-दूर तक उसका व्यापार फैला हुआ था। नगर में उस व्यापारी का सभी लोग मान-सम्मान करते थे। इतना सबकुछ होने पर भी वह व्यापारी अंतर्मन से बहुत दुखी था क्योंकि उस व्यापारी का कोई पुत्र नहीं था। दिन-रात उसे एक ही चिंता सताती रहती थी। उसकी मृत्यु के बाद उसके इतने बड़े व्यापार और धन-संपत्ति को कौन संभालेगा। पुत्र पाने की इच्छा से वह व्यापारी प्रति सोमवार भगवान शिव की व्रत-पूजा किया करता था। सायंकाल को व्यापारी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव के सामने घी का दीपक जलाया करता था। उस व्यापारी की भक्ति देखकर एक दिन पार्वती ने भगवान शिव से कहा- 'हे प्राणनाथ, यह व्यापारी आपका सच्चा भक्त है। कितने दिनों से यह सोमवार का व्रत और पूजा नियमित कर रहा है। भगवान, आप इस व्यापारी की मनोकामना अवश्य ...Read More...

    महामृत्युंजय मंत्र


    "ॐ त्र्यम्बकं य्यजा महे |
    सुगन्धिम्पुष्टि वर्द्धनम् ||
    उर्व्वा रुक मिव बन्धनान् |
    मृत्योर्म्मुक्षीय मामृतात् " ||



    MAHA MRITYUNJAYA MANTRA


    Aum Trayambakam Yajamahe |
    Sugandhim Pushtivardhanam ||
    Urva Rukamiva Bandhanaan |
    Mrityor Mokshiye Maamritat"||



    Maha Mrityunjaya Mantra Meaning

    OM. We worship the Three-eyed Lord who is fragrant and who nourishes and nurtures all beings. As the ripened cucumber (with the intervention of the gardener) is freed from its bondage (to the creeper), may he liberate us from death for the sake of immortality..


    ॥दोहा॥
    नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
    तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
    मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
    अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥

    • Somnath Jyotirlinga Saurashtra in Gujarat

      Mahakalshwar Jyotiling Ujjian

    • >Omkareshwar temple Narmada river in Madhya Pradesh

      Omkareshwar temple Narmada river in Madhya Pradesh

    • Mahakaleshwara Temple Ujjain  in Madhya Pradesh

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    • Mallikarjun Temple, Nallamalai Hills,Srisailam in Andhra Pradesh

      Mallikarjun Temple,Srisailam in Andhra Pradesh

    • Vaidyanath Temple, Deogarh Santal Parganas region of Bihar

      Vaidyanath Temple, Deogarh Santal Parganas region of Bihar

    • Sanwaliya seth chittorgarh

      Bhimashankar Temple, Pune in Maharashtra

    • Rameshwaram Temple in TamilNadu

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    • Nageshwar Temple, Dwarka in Gujrat

      Nageshwar Temple, Dwarka in Gujrat

    • Vishwanath Temple,Varanasi, Banaras in Uttar Pradesh

      Vishwanath Temple,Varanasi, Banaras in Uttar Pradesh

    12 jyotirlinga