Recent News Update


Bhakton Ke Vichar

  • Gagan Bafna Jai Shani Dev
  • TARUN SHARMA बहुत अच्छी वेबसाइट बना
  • GOVIND GOUR jai hooshree sanweriya seth ki jai ho....
  • GOVIND GOUR sanwriya set ki jai hoo. jai shree krishana ....vande vishnu
  • GOVIND GOUR jai hoo sanwriya set ki jai hoo... setho ke set sanwriya set
  • साँवलिया सेठ का इतिहास एवं कथा - History of Sanwaliya Seth

    भगवान श्री साँवलिया सेठ का संबंध मीरा बाई से बताया जाता है। किवदंतियों के अनुसार साँवलिया सेठ मीरा बाई के वही गिरधर गोपाल है जिनकी वह पूजा किया करती थी। मीरा बाई संत महात्माओं की जमात में इन मूर्तियों के साथ भ्रमणशील रहती थी। ऐसी ही एक दयाराम नामक संत की जमात थी जिनके पास ये मुर्तिया थी।
    बताया जाता है की जब औरंगजेब की मुग़ल सेना मंदिरो को तोड़ रही थी तो मेवाड़ राज्य में पहुचने पर मुग़ल सैनिको को इन मूर्तियों के बारे में पता लगा तो संत दयाराम जी ने प्रभु प्रेरणा से इन मूर्तियों को बागुंड-भादसौड़ा की छापर (खुला मैदान ) में एक वट-वृक्ष के निचे गड्ढा खोद के पधरा दिया और फिर समय बीतने के साथ संत दयाराम जी का देवलोकगमन हो गया।

    श्री साँवलिया सेठ मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए लिंक यहाँ क्लिक करें



    किवदंतियों के अनुसार कालान्तर में सन 1840 मे मंडफिया ग्राम निवासी भोलाराम गुर्जर नाम के ग्वाले को एक सपना आया की भादसोड़ा-बागूंड गाँव की सीमा के छापर मे 3 मूर्तिया ज़मीन मे दबी हुई है, जब उस जगह पर खुदाई की गयी तो भोलाराम का सपना सही निकला और वहा से एक जैसी 3 मूर्तिया प्रकट हुयी। सभी मूर्तिया बहुत ही मनोहारी थी। देखते ही देखते ये खबर सब तरफ फ़ैल गयी और आस-पास के लोग प्राकट्य स्थल पर पहुचने लगे।


    फिर सर्वसम्मति से 3 में से सबसे बड़ी मूर्ति को भादसोड़ा ग्राम ले जायी गयी, भादसोड़ा में सुथार जाति के अत्यंत ही प्रसिद्ध गृहस्थ संत पुराजी भगत रहते थे। उनके निर्देशन में उदयपुर मेवाड राज-परिवार के भींडर ठिकाने की ओर से साँवलिया जी का मंदिर बनवाया गया। यह मंदिर सबसे पुराना मंदिर है इसलिए यह साँवलिया सेठ प्राचीन मंदिर के नाम से जाना जाता है। मझली मूर्ति को वही खुदाई की जगह स्थापित किया गया इसे प्राकट्य स्थल मंदिर भी कहा जाता है। सबसे छोटी मूर्ति भोलाराम गुर्जर द्वारा मंडफिया ग्राम ले जायी गयी जो उन्होंने अपने घर के परिण्डे में स्थापित करके पूजा आरम्भ कर दी ।



    कालांतर में सभी जगह भव्य मंदिर बनते गए। तीनो मंदिरों की ख्याति भी दूर-दूर तक फेली। आज भी दूर-दूर से लाखों यात्री प्रति वर्ष श्री साँवलिया सेठ दर्शन करने आते हैं।

    श्री साँवलिया सेठ मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए लिंक यहाँ क्लिक करें
    आज के दर्शन के लिए यहाँ क्लिक करें



    साँवलिया सेठ मूर्ति प्राकट्य स्थल मंदिर - Sanwaliaji JanamSthal - Murti Prakatya Sthal