पूजन में क्षमायाचना करनी जरूरी है। जानिए क्यों ?

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पूजन में प्रयास तो ऐसा होना चाहिए कि त्रुटियां कम से कम हों , लेकिन जो भूलवश हो जाएं , उनके लिए क्षमायाचना करनी जरूरी है।kshamayachna

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेsहर्निशं मया ।
दासोsयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्र्वरि ॥ १

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम् ।
पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्र्वरि ॥ २

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्र्वरि ।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्ण तदस्तु मे ॥ ३

अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत् ।
यां गतिं सम्वान्पोते न तां ब्रह्मादयः सुरा: ॥ ४

सापाराधोsस्मि शरणं प्राप्पस्त्वां जगदम्बिके ।
इदानीमनुकम्प्योsहं यथेच्छसि तथा कुरू ॥ ५

अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम् ।
तत्सर्व क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्र्वरि ॥ ६

कामेश्र्वरि जगन्मातः सच्चिदानन्दविग्रहे ।
गृहाणार्चामिमां प्रीत्या प्रसीद परमेश्र्वरि ॥ ७

गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम् ।
सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादात्सुरेश्र्वरि ॥ ८

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