राहू ग्रह

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राहू

राहू, आरोही / उत्तर चंद्र आसंधि के देवता हैं। राहु, राक्षसी सांप का मुखिया है जो हिन्दू शास्त्रों के अनुसार सूर्य या चंद्रमा को निगलते हुए ग्रहण को उत्पन्न करता है। चित्रकला में उन्हें एक ड्रैगन के रूप में दर्शाया गया है जिसका कोई सर नहीं है और जो आठ काले घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले रथ पर सवार हैं। वह तमस असुर है जो अराजकता में किसी व्यक्ति के जीवन के उस हिस्से का पूरा नियंत्रण हासिल करता है। राहू काल को अशुभ माना जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन  के दौरान असुर राहू ने थोड़ा दिव्य अमृत पी लिया था। लेकिन इससे पहले कि अमृत उसके गले से नीचे उतरता, मोहिनी (विष्णु का स्त्री अवतार) ने उसका गला काट दिया. वह सिर, तथापि, अमर बना रहा और उसे राहु कहा जाता है, जबकि बाकी शरीर केतु बन गया। ऐसा माना जाता है कि यह अमर सिर कभी-कभी सूरज या चांद को निगल जाता है जिससे ग्रहण फलित होता है। फिर, सूर्य या चंद्रमा गले से होते हुए निकल जाता है और ग्रहण समाप्त हो जाता है।

राहु ग्रह दोष के प्रभाव :

  1. मोटापे के कारण परेशानी
  2. अचानक दुर्घटना, लड़ाई-झगड़े की आशंका
  3. हर तरह के व्यापार में घाटा

राहु ग्रह दोष के उपाय:

  1. मां सरस्वती की आराधना करें
  2. ऊं ऐं सरस्वत्यै नम मंत्र का 1 माला जाप करें
  3. तांबेके बर्तन में गुड़, गेहूं भरकर बहते जल में प्रवाहित करें
  4. माता से संबंध मधुर रखें
  5. 400 ग्राम धनिया, बादाम जल में प्रवाहित करें
  6. घर की दहलीज के नीचे चांदी का पत्ता लगायें
  7. सीढ़ियों के नीचे रसोईघर का निर्माण न करवायें
  8. रात में पत्नी के सिर के नीचे 5 मूली रखें, सुबह मंदिर में दान कर दें
  9. मां सरस्वती के चरणों में लगातार 6 दिन तक नीले पुष्प की माला चढ़ायें
  10. चांदी की गोली हमेशा जेब में रखें
  11. लहसुन, प्याज, मसूर के सेवन से परहेज करें
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राहु ग्रह का मंत्र :

ऊं नमो अर्हते भगवते श्रीमते नेमि तीर्थंकराय सर्वाण्‍हयक्ष कुष्‍मांडीयक्षी सहिताय |
ऊं आं क्रौं ह्रीं ह्र: राहुमहाग्रह मम दुष्‍टग्रह, रोग कष्‍ट निवारणं सर्व शान्तिं च कुरू कुरू हूं फट् || 18000 जाप्‍य ||

तान्त्रिक मंत्र – ऊं भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम: || 18000 जाप्‍य ||

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