दशामाता व्रत कथा 8

दशामाता व्रत कथा 8

पुराने समय की बात है की एक घर मैं एक जेठानी-देवरानी थी | वे दोनों निसंतान थी | वे मेहनत करके पेट पालती थी | दोनों व्रत पूजन कुछ भी नहीं करती थी |

एक दिन दोनों प्रात काल गांव मैं आग लेने गई | उस दिन गांव मैं दशामाता का पूजन था | इसलिए उन्हें किसी के यहाँ से भी आग नहीं मिली | आग न मिलने पर जेठानी देवरानी से बोली -‘ आज हम दोनों का भी व्रत रहेगा | शाम को आग मिलने पर ही रसोई बनाकर भोजन करेंगी |’

शाम हो जाने पर जेठानी अपनी पड़ोसन के यहाँ से आग लेने गई | पड़ोसन ने उसे आदर पूर्वक बैठाया |जेठानी ने पड़ोसन से पूछा -‘ दशामाता का पूजन करने से क्या होता है ? ‘ पड़ोसन ने बताया की -‘ जिस बात की इच्छा करके डोरा लिया जाता है वह इच्छा पूर्ण हो जाती है |’

जेठानी यह सुनकर पड़ोसन से बोली -‘ अगली बार जब डोरा लेना हो तो मुझे भी बताना | मैं भी डोरा लुंगी |’

जेठानी जैसे ही आग लेकर घर से बाहर आई तो उसे गाये चरकर आती दिखाई दी | ग्वाला पीछे आ रहा था | उसके कंधे पर एक बछड़ा था और एक गाय बछड़े को चाटते हुए चल रही थी | पड़ोसन ने ग्वाले से पूछा -‘तुम्हारी गाय के पहली बार प्रसव हुआ है क्या ?’ ग्वाले ने बताया की -‘ हां |’ पड़ोसन ने फिर पूछा -‘ गाय ने बछड़ा दिया है बछिया ?’ ग्वाला बोला -‘ बछड़ा है |’

यह जानकर जेठानी से पड़ोसन ने कहा की -‘ घर जाकर दशामाता का डोरा ले लो | नो दिन तक व्रत रखकर कथा सुनना तथा दसवे दिन सिर सहित स्नान करके पूजन करना | दशामाता चाहेंगी तो दस दिन के भित्तर ही तुम्हारी मनोकामना पूर्ण हो जाएगी |’ जेठानी ने घर जाकर सारी बातें देवरानी को बताई | दोनों ने दशामाता से मनोती मांगी की -‘ यदि हम दोनों की संतान होगी तो हम सुहागिनों को न्योता देंगे |’ दोनों ने दशामाता का डोरा लिया |

दशामाता की कृपा से डोरे की पूजा से पहले ही दोनों देवरानी जेठानी गर्भवती हो गई | नो महीने ,नो दिन के बाद दोनों ने यहाँ दो लड़को ने जन्म लिया |बालको के नामकरण संस्कार के बाद देवरानी ने जेठानी से कहा -‘ हमने जो सुहागिनों को न्योतने की मनोती मांगी थी उसे अब पूरा करना चाहिए |’ जेठानी ने कहा की -‘ अभी ऐसी क्या जल्दी है ? जब लड़को का अन्नप्रासन संस्कार होगा तब सुहागिनों को न्योता देंगे |’

जब लड़को का अन्नप्रासन संस्कार हुआ तब देवरानी ने जेठानी से सुहागिनों को न्योतने की बात कही | परन्तु जेठानी ने बात को टाल दिया और कहा की -‘ लड़को के मुंडन संस्कार पर सुहागिनों को न्योता देंगे |’ होते-होते कुछ समय बाद लड़को का मुंडन संस्कार भी हो गया | देवरानी ने जेठानी को सुहागिनों के न्योतने की बात कही | जेठानी बोली -‘ लड़को की सगाई के समय ही सुहागिने न्योति जायगी |’

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लड़के बड़े हो गए | उनकी सगाई भी हो गई परंतु जेठानी ने अब की बार भी सुहागिने नहीं न्योति | जेठानी बोली -‘ जिस दिन लड़को के फेरे होंगे उसी दिन सुहागिनों को न्योता देंगे |’ इस पर देवरानी बोली-‘ बहिन ! तुम्हारी जब इच्छा हो तब सुहागिनों को न्योता देना | परंतु में तो लग्न के दिन ही सुहागिने को न्योत दूंगी | ‘ देवरानी ने लग्न के दिन ही सुहागिनों को न्योता दिया परंतु जेठानी ने कुछ भी परवाह न की |

लग्न के बाद मातृ का पूजन करके दोनों दूल्हे बारात सजाकर बैंड-बाजे सहित ब्याहने चल दिए | देवरानी के बेटे का विवाह बड़े धूमधाम से सकुसल पूर्ण हो गया | परंतु जेठानी ने सुहागिनों को न्योता नहीं दिया था | इसलिए दशामाता ठीक फेरो के समय उसे उठा कर ले गई | दूल्हे के सहसा गायब हो जाने के कारण वर-कन्या दोनों मैं हा-हाकार मच गया | उसकी बारात खाली हाथ घर लौटकर आई | परंतु लड़की की माता बड़े संकट मैं पड़ गई इस अधब्याही लड़की से कोन विवाह करेगा ?

पड़ोस की चतुर सुहागिनों ने लड़की की माता को समझाया की -‘ ब्याह का जो सामान बचा है उस सामान को लड़की के हवाले कर दिया जाये |’ लड़की भिखारियों को सदाव्रत देने लगी |

एक दिन एक साधु तीर्थ यात्रा करता हुआ वहा आया | गांव से घने जंगल मैं एक पीपल का पेड़ था | लोग इस पीपल के पेड़ को पारस पीपल कहते थे | उसी पेड़ पर दशामाता का निवास था | साधु चलता चलता शाम को उसी पेड़ के निचे ठहर गया | झाड़ूदार ने आकर उसी पेड़ के पास के मैदान मैं झाड़ू लगाई | भिस्ती ने मस्क से वहा पर छिड़काव कर दिया तथा माली ने यह फूल बिखेर दिए | तब एनेक देवता अनेक प्रकार की पोशाक पहन कर आने लगे तथा स्थान पर बैठने लगे | सबसे बाद मैं स्वर्ग के राजा इंद्र का शिहासन उतरा | इसी के साथ स्वर्ग की अप्सराये आकर शिहासन के चारो और नाचने लगी |

उसी समय अधब्याहे लड़के को गोद मैं लेकर दशामाता पीपल के पेड़ से निचे उतरी | इंद्र के साथ स्वर्ग से एक सूरा गाय भी आई थी | उसने दो गिलास दूध दिया था | लड़के ने अधब्याहे के भाग का एक गिलास अलग रख दिया गया | दूसरे गिलास का दूध भी पि लिया | जब तक अप्सराओ का नाच-गान होता रहा दशामाता लड़के को गोद मैं लेकर बैठी रही | प्रात:काल होते ही देवताओ का दरबार भंग हुआ | साधु भी वहा से चल कर गांव मैं आया |

साधु महाराज गांव मैं भिक्षा मांगते-मांगते अधब्याहे लड़की के घर पर पहुचा | लड़की ने आदर पूर्वक साधु को बैठाया और भोजन तैयार किया | लड़की ने तीन पत्तल परोस कर रखे | पहली पत्तल अधब्याहे अपने पति की लिए रखी  | दूसरी पत्तल बाबाजी के सामने रखी और एक पत्तल अपने सामने रखी | बाबा ने अपने आप कहा-‘ वाह ! जो बात मैंने रात वहा देखी वही बात यही भी देखने को मिल रही है |’ लड़की ने पूछा -‘ क्या बात है बाबाजी !’ साधु बाबा ने बात टालते हुए कहा -‘ हम बैरागी लोग ऐसी एनेक बाते कहते रहते है | तुम्हे ऐसी बातो से क्या मतलब | तुम तो भोजन करो और भगवान का भजन करो |’

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लड़की ने हट पकड़ ली | उसने कहा -‘ जब तक आप अपनी कही बात का खुलासा नहीं करेंगे मैं भोजन नहीं करुँगी |’ इस पर भी साधु बाबा चुप रहे | तब लड़की बोली की -‘ आप साधु है और मैं सती हु | आप या तो अपने कथन को स्प्ष्ट कीजिये की आपने रात मैं क्या देखा | नहीं तो मैं आपको शाप दे दूंगी |’तब साधु बाबा ने रात का सारा किस्सा कह सुनाया | यह सुनकर लड़की ने बाबा के साथ पीपल के पेड़ के पास जाने का निश्चय कर लिया |

साधु बाबा आगे आगे चले और लड़की उनके पीछे-पीछे चलती रही | साधु बाबा लड़की को पारस पीपल के पास छोड़कर चले गए | संध्या होने पर नित्य की तरह जमादार ने झाड़ू लगाई , भिस्ती ने अपनी मस्क से पानी का छिड़काव किया और माली ने फूल बिछाये | देवताओ के राजा इंद्र आये | अप्सराओ का नाच-गान प्रारम्भ हो गया | उसी समय दशामाता पीपल के पेड़ पर से उत्तर कर दरबार मैं बैठ गई | लड़के ने सूरा गाय का दूध लिया और एक गिलास अधब्याही लड़की के लिए रख दिया | जैसे ही लड़के ने दूध का गिलास मुह पर लगाया त्यों ही लड़की दूसरा गिलास हाथ मैं लेकर वर के सामने आ गई | वह बोली -‘ अपना भाग लेने के लिए मैं उपस्थित हु | मेरे लिए क्या आज्ञा है | मैं सेवा करने के लिए तैयार हु |’

तब लड़का बोला -‘ मैं इस तरह से तुम से नहीं मिल सकता | मैं दशामाता की सेवा मैं रहता हु | मुझे अभी दरबार मैं जाकर दशामाता की गोद मैं बैठना होगा यदि तुम्हे मुझसे प्यार है तो दशामाता को प्रसन्न करके उनसे मुझे अपने लिए मांग सकती हो | तब मैं तुम्हारा हो सकता हु |’ लड़का दूध पीकर दशामाता की गोद मैं जाकर बैठा | लड़की अप्सराओ के साथ नाच-गाने लगी जब सवेरा हुआ तो दशामाता ने इस नई लड़की को बुला कर पूछा-‘ तुम कोन हो ? तुम्हारे नाचने से मैं बहुत प्रसन्न हुई | जो कुछ मांगना है मांग लो | ‘ लड़की ने दशामाता से वचन ले लिया की -‘ मैं जो कुछ मांगूंगी वह आप मुझे प्रदान करेंगी |’ ‘ तथास्तु  कहने के बाद लड़की ने दशामाता ने अपने अपने पति को पकड़ कर कहा -‘ मुझे यही चाहिए |’ दशामाता ने कहा -‘ तूने माँगा तो बहुत परंतु मैं वचन दे चुकी हु  इसी कारण मैं  तेरे पति को तुझे वापस देती हु |’ राजा इंद्र ने पूछा की -‘ भगवती यह सब क्या राज है ? मैं इस राज को जानना चाहता हु |’ तब दशामाता ने बताया की -‘ यह लड़का मेरे वरदान से ही प्राप्त हुआ था और इसकी माता ने मनोती मांगी थी की लड़का पैदा होने पर मैं सुहागिनों को न्योता दूंगी | परन्तु उसने अभी तक अपना वचन पूरा नहीं किया | इस कारण मैं इस लड़के को विवाह मंडप से उठा लाई थी | यह लड़की इसकी अधब्याही पत्नी है और पतिव्रता है | पतिव्रता होने के कारण यह देव समाज मैं पहुच कर मझसे अपना पति मांग रही है |’

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दशामाता के ऐसे वचन सुनकर इंद्र सहित सब देवताओ ने वर-वधु के ऊपर पुष्प की वर्षा की | तब तक साधु बाबा भी वहा पर आ गए | साधु बाबा दूल्हा और दुल्हन को साथ लेकर गांव की और चल पड़े | जब ये तीनो गांव के समीप पहुचे तो गांव वालो ने दूल्हा-दुल्हन को देखकर लड़की के पिता को सुचना दी की -‘ तुम्हारी पुत्री एप दूल्हे के साथ आ रही है |’ जिस दिन से लड़की चली गई थी तो उसके पिता ने लोकापवाद के डर से बाहर निकलना बंद कर दिया था | गांव वालो की यह भी बात सुनकर उसने घर के किवाड़ बन कर लिए | उसने समझा लड़की साधु बाबा के साथ आ रही होगी | इसलिए लोग मेरा उपहास कर रहे है | जब गांव के गणमानय व्यक्तियों ने भी वही बात बताई , तब उसने घर के किवाड़ खोले और बाहर निकला |

जब उसने सचमुच अपने द्वार पर लड़की और दामाद को खड़े देखा तो उसकी प्रसन्नता का ठिकाना नहीं रहा | लड़की के पिता ने इस ख़ुशी को मोके पर बहुत दान-पूण्य किया और फिर से विवाह की तयारी की | लड़की ने अपनी माता से कहा की – ‘ इस तरह से विवाह नहीं होगा | पहले दूल्हे की माता सुहागिनों को न्योता देकर बारात लेकर आये तब विवाह के नेग पुरे किये जाये |’

लड़की के पिता ने लड़के के घर पर खबर भेजी | लड़के की माँ ने पहले सुहागिनों को न्योता दिया तब बारात चली | बड़ी धूमधाम से विवाह हुआ | वर-वधु दोनों अपने घर पर आ गए | वधु की ख़ुशी मैं लड़के की माता ने दुबारा सुहागिनों को न्योता दिया | उसी समय से विवाह के दिन वर के घर पर सुहागिनों का न्योतने की प्रथा चली आ रही है

दशामाता ने जिस तरह सती की दशा बदली , वैसी वह सभी का कल्याण करे |

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