कैसे कहलाये सांवलिया सेठ ?

यद्धपि भगवान् के नाम के आगे सेठ नहीं लगता लेकिन सांवलिया जी के नाम के साथ “सेठ ” शब्द लगता है । सम्भवतया: इसके 2 कारण हो सकते है ।
पहला नरसी के भगत कारण : जूनागढ़ सौराष्ट्र- गुजरात में प्रसिद्ध संत नरसी मेहता और नरसी भगत हुए । वो कृष्ण के अनन्य भक्त थे । सम्भवतया: नरसी भगत की पुत्री नानी बाई का मायरा – भात भरने के लिए भगवन कृष्ण ने साँवल सेठ का रूप धरा इसलिए सांवलिया सेठ कहलाने लगे ।
या फिर दूसरा मंदिर में भंडारे (हुंडी- दानपात्र ) से भरपूर धन निकलने के कारण इनको सांवलिया सेठ कहा जाने लगा । वर्तमान में श्रद्धालुओं के द्वारा भगवन के सम्मुख स्थापित भंडार (हुंडी- दानपात्र) में प्रतिमाह करोड़ों रूपये, सोना चाँदी के आभूषण भेंट किये जाते है । जिसकी भी मनोकामना पूरी होती है वो अपनी आस्था से भंडार में भेंट चढ़ाता है । इसीलिए श्रद्धालु भी कहते  है की “सेठों में सांवरा सेठ , बाकि सब डुप्लीकेट “ । ॥ बोलो श्री सांवलिया सेठ की – जय॥

सांवलिया सेठ

सांवलिया सेठ

सांवलिया सेठ के भंडार के बारे में भी कहते है की..
सांवलिया सेठ के भंडार की है अपूर्व बात ।
ज्यों खर्चे त्यों बढे बिन खर्चे घटि जात ॥

sanwaliya seth bhandar

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